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मैं मर जाता हुँ

*मैं मर जाता हूँ* कोशिश तो बहुत करता हूँ कि तुमको प्यार करूं, चाहूं इतना कि सारी हदे पार करूं! पर उस एक नाम के आगे शिथिल पड़ जाता हूँ, कैसे कहूं मैं कि जब लेती हो उसका नाम, तो जिन्दा होते हुए भी मैं मर जाता हूँ ! माना कि बहुत प्यार दिया होगा उसने, हो सकता है सबकुछ वार दिया होगा उसने, पर मुझसा नहीं चाहेगा कोई तुमको, यह एहसास भी दिलाया होगा उसने! पर जब तोलती हो मेरी मोहब्बत को उसके लफ्जो से, बोलना होता है बहुत कुछ, पर चुप हो जाता हुँ! सच में! जिन्दा होते हुए भी मैं मर जाता हुँ! न समझ पाई तुम कभी मेरी मोहब्बत को, शायद कम था समय या मेरी सिद्द्त को! तमन्ना थी बहुत कुछ कर गुजरने की तेरे वास्ते, पर आज भी उससे मिलने की तेरी ख्वाहिश के आगे झुक जाता हुँ, तेरी ख़ुशी के आगे अपनी मोहब्बत हार जाता हुँ, सच में! जिन्दा होते हुए भी मैं मर जाता हुँ! चलो आज तुमसे अलविदा कहते हैँ, तुम रहो खुश उसकी यादों में यही दुआ करते हैँ! वो तो हो गया किसी और का और तुम गम खाये बैठो हो! वो नहीं है खुश अपनी जिंदगी में, यह गलतफ़हमी दिल से लगाए बैठे हो! सोचता हूँ अब कि वापस लौट जाता हुँ, कैसे कहूं मैं कि जब लेती हो उसका नाम, ...

मेरी तमन्ना

*मेरी तमन्ना* जा रहे हो यूँ मुझको तन्हा करकर, जिंदगी के एक नए सफर पर! जीवन के इस नए सफर में, मेरे बिना! खुश रह पाओगे क्या! अच्छा सुनो! कुछ तमन्नाएं हैं मेरी, उन्हें पूरा कर पाओगे क्या!🌹 लगेगी हल्दी जब तेरे गोरे बदन पर, प्रेम में मिले जखम पर! उसी हल्दी के रंग में, मेरे प्रेम रंग को ढूंढ पाओगे क्या! कुछ तमन्नाएं हैं मेरी.......🌹 बैठेंगी जब सखिया-सहेलियां संग! और होगी तुम्हारी मेहंदी की रसम, मेरे नाम की मेहंदी! अपने हाथों में रचा पाओगे क्या! कुछ तमन्नाएं हैं मेरी.......🌹 श्रृंगार करके जब आओगे, सबके दिल में उतर जाओगे! देखेंगी तुमको हजारों नजरें, कि देखेंगी तुमको हजारों नजरें! उन हजारों नज़रो में, मेरी नज़र को ढूंढ पाओगे क्या! कुछ तमन्नाएं हैं मेरी...🌹 याद है तुम्हें वो बीते पल! बिताये थे जो मेरे संग कल! आख़री मुलाक़ात थी वो हमारी, कि आख़री मुलाक़ात थी वो हमारी! उस आख़री मुलाक़ात को, तेरे संग गुजारी उस रात को, मुक़्क़मल कर पाओगी क्या! कुछ तमन्नाएं हैं मेरी.....🌹 नहीं करता मैं कुछ ज्यादा ख़्वाइश, न ही मिलने की आजमाइश! बस मुझको इतना बता दो! कभी मुझे भूल पाओगे क्या! कुछ तमन्नाएं हैं मेरी.........🌹 ...

मुक़म्मल इश्क. 🌹

*मुकम्मल इश्क* आज मुझसे मिलने मेरी मौत आई थी, कि आज मुझसे मिलने मेरी मौत आई थी! और संग में अपने मेरे गुनाहों का हिसाब लाई थी!🌹 एक-एक करके कर रही थी वो मेरे गुनाहों का हिसाब, कि एक-एक करके कर रही थी वो मेरे गुनाहों का हिसाब! और अचानक रुक गए उसके हाथ! क्योंकि उसके हाथ मेरी मोहब्बत आई थी!🌹 कहने लगी मुझसे, कि तमन्ना थी तेरी मुकम्मल इश्क की! पर मुकम्मल तो मौत है! पर मुकम्मल तो मौत है! इसलिये मैं तुझसे मिलने आई थी!🌹 न मिला मुक्कमल इश्क! और न मिली मुकम्मल मौत मुझको! कि न मिला मुक्कमल इश्क! और न मिली मुकम्मल मौत मुझको!🌹 मर तो मैं गया था उसी दिन, कि मर तो गया था मैं उसी दिन! जब उसने कहा था! कि वो अमानत थी किसी और की, मेरे लिए तो वो पराई थी!🌹 आज मुझसे मिलने.......🌹 ................हरी शंकर (नयन)

क्या फर्क पड़ता है.....

*क्या फर्क पड़ता है* माना कि वो नहीं हैं मुक्कदर में हमारे, कि माना कि वो नहीं हैं मुक़्क़दर में हमारे! तो क्या फर्क पड़ता है!🌹 यह मेरा इश्क है जो है उनसे, कि यह मेरा इश्क है जो है उनसे! और मुझे ही निभाना है! वो हाँ करें या न! क्या फर्क पड़ता है!🌹 वो खुश हैं किसी और की बाहों में जाकर, कि वो खुश हैं किसी और की बाहों में जाकर! मैं खुश हूँ या नहीं बगैर उनके, क्या फर्क पड़ता है!🌹 तमन्ना थी कि कभी तो आएंगे मेरी गलियों में वो, कि तमन्ना थी कि कभी तो आएंगे मेरी गलियों में वो! और देखूंगा उन्हें नजरें भरकर किसी रोज़! पर मेरी तमन्नाओ से उन्हें, क्या फर्क पड़ता है!🌹 टूट जाएंगी किसी पल साँसों की ये कड़ियाँ, कि टूट जाएंगी किसी पल साँसों की ये कड़ियाँ, और चले जायेंगे एक दिन उनसे दूर! लेकिन हमारे जाने से उन्हें! क्या फर्क पड़ता है!🌹 वो कहती है, कि किसी के चले जाने से जिंदगी नहीं रूकती! वो कहती है, कि किसी के चले जाने से जिंदगी नहीं रूकती! एक तुम भी चले जाओगे तो! क्या फर्क........ 🌹 ....................*हरी शंकर (नयन)*

वो पढ़ रही है मुझको...... 🌹

*वो पढ़ रही है मुझको* जाना था उन्हें एक दिन और वो चले गये! कभी न समझा पाए हम अपनी मोहब्बत उसको! मिले किसी रोज़ ख्वाइश-ए-तमन्ना है दिल की! फिर से उसी प्यार से गले लगाऊं उसको!🌹 यूँ तो जीता है हर एक शख्स इस दुनियाँ में! कि यूँ तो जीता है हर एक शख्स इस दुनियाँ में! पर मैं तो हर रोज़ जी रहा हूँ उसको!🌹 उसकी ऑंखें, उसकी बातें और उसका मुस्कराना! उसकी आँखें, उसकी बातें और उसका मुस्कराना! होना मेरा तन्हा और उसका सीने से लगाना! आज होता हूँ तन्हा तो सोचता हूँ. कि आज होता हूँ तन्हा तो सोचता हूँ! अब गले लगाऊं किसको!🌹 सोचता हूँ बताऊं उसे अपना हाल! कि सोचता हूँ बताऊं उसे अपना हाल, और लिखूं किसी रोज़ एक खत उसको!🌹 फिर याद आता है उसका मुझे यूँ छोड़कर चले जाना, कि फिर याद आता है उसका मुझे यूँ छोड़कर चले जाना! और आज यह आलम है उनकी मोहब्बत का, मैं लिख रहा हूँ उसको और वो पढ़ रही है मुझको! वो पढ़ रही है मुझको........🌹                  *हरी शंकर (नयन)*