मुक़म्मल इश्क. 🌹
*मुकम्मल इश्क*
आज मुझसे मिलने मेरी मौत आई थी,
कि आज मुझसे मिलने मेरी मौत आई थी!
और संग में अपने मेरे गुनाहों का हिसाब लाई थी!🌹
एक-एक करके कर रही थी वो मेरे गुनाहों का हिसाब,
कि एक-एक करके कर रही थी वो मेरे गुनाहों का हिसाब!
और अचानक रुक गए उसके हाथ!
क्योंकि उसके हाथ मेरी मोहब्बत आई थी!🌹
कहने लगी मुझसे,
कि तमन्ना थी तेरी मुकम्मल इश्क की!
पर मुकम्मल तो मौत है!
पर मुकम्मल तो मौत है!
इसलिये मैं तुझसे मिलने आई थी!🌹
न मिला मुक्कमल इश्क!
और न मिली मुकम्मल मौत मुझको!
कि न मिला मुक्कमल इश्क!
और न मिली मुकम्मल मौत मुझको!🌹
मर तो मैं गया था उसी दिन,
कि मर तो गया था मैं उसी दिन!
जब उसने कहा था!
कि वो अमानत थी किसी और की,
मेरे लिए तो वो पराई थी!🌹
आज मुझसे मिलने.......🌹
................हरी शंकर (नयन)