क्या फर्क पड़ता है.....
*क्या फर्क पड़ता है*
माना कि वो नहीं हैं मुक्कदर में हमारे,
कि माना कि वो नहीं हैं मुक़्क़दर में हमारे!
तो क्या फर्क पड़ता है!🌹
यह मेरा इश्क है जो है उनसे,
कि यह मेरा इश्क है जो है उनसे!
और मुझे ही निभाना है!
वो हाँ करें या न!
क्या फर्क पड़ता है!🌹
वो खुश हैं किसी और की बाहों में जाकर,
कि वो खुश हैं किसी और की बाहों में जाकर!
मैं खुश हूँ या नहीं बगैर उनके,
क्या फर्क पड़ता है!🌹
तमन्ना थी कि कभी तो आएंगे मेरी गलियों में वो,
कि तमन्ना थी कि कभी तो आएंगे मेरी गलियों में वो!
और देखूंगा उन्हें नजरें भरकर किसी रोज़!
पर मेरी तमन्नाओ से उन्हें,
क्या फर्क पड़ता है!🌹
टूट जाएंगी किसी पल साँसों की ये कड़ियाँ,
कि टूट जाएंगी किसी पल साँसों की ये कड़ियाँ,
और चले जायेंगे एक दिन उनसे दूर!
लेकिन हमारे जाने से उन्हें!
क्या फर्क पड़ता है!🌹
वो कहती है,
कि किसी के चले जाने से जिंदगी नहीं रूकती!
वो कहती है,
कि किसी के चले जाने से जिंदगी नहीं रूकती!
एक तुम भी चले जाओगे तो!
क्या फर्क........ 🌹
....................*हरी शंकर (नयन)*