वो पढ़ रही है मुझको...... 🌹

*वो पढ़ रही है मुझको*

जाना था उन्हें एक दिन और वो चले गये!
कभी न समझा पाए हम अपनी मोहब्बत उसको!

मिले किसी रोज़ ख्वाइश-ए-तमन्ना है दिल की!
फिर से उसी प्यार से गले लगाऊं उसको!🌹

यूँ तो जीता है हर एक शख्स इस दुनियाँ में!
कि यूँ तो जीता है हर एक शख्स इस दुनियाँ में!
पर मैं तो हर रोज़ जी रहा हूँ उसको!🌹

उसकी ऑंखें, उसकी बातें और उसका मुस्कराना!
उसकी आँखें, उसकी बातें और उसका मुस्कराना!
होना मेरा तन्हा और उसका सीने से लगाना!
आज होता हूँ तन्हा तो सोचता हूँ.
कि आज होता हूँ तन्हा तो सोचता हूँ!
अब गले लगाऊं किसको!🌹

सोचता हूँ बताऊं उसे अपना हाल!
कि सोचता हूँ बताऊं उसे अपना हाल,
और लिखूं किसी रोज़ एक खत उसको!🌹

फिर याद आता है उसका मुझे यूँ छोड़कर चले जाना,
कि फिर याद आता है उसका मुझे यूँ छोड़कर चले जाना!
और आज यह आलम है उनकी मोहब्बत का,
मैं लिख रहा हूँ उसको और वो पढ़ रही है मुझको!
वो पढ़ रही है मुझको........🌹


                 *हरी शंकर (नयन)*