मेरी तमन्ना

*मेरी तमन्ना*

जा रहे हो यूँ मुझको तन्हा करकर,
जिंदगी के एक नए सफर पर!
जीवन के इस नए सफर में, मेरे बिना!
खुश रह पाओगे क्या!
अच्छा सुनो!
कुछ तमन्नाएं हैं मेरी, उन्हें पूरा कर पाओगे क्या!🌹

लगेगी हल्दी जब तेरे गोरे बदन पर,
प्रेम में मिले जखम पर!
उसी हल्दी के रंग में,
मेरे प्रेम रंग को ढूंढ पाओगे क्या!
कुछ तमन्नाएं हैं मेरी.......🌹

बैठेंगी जब सखिया-सहेलियां संग!
और होगी तुम्हारी मेहंदी की रसम,
मेरे नाम की मेहंदी!
अपने हाथों में रचा पाओगे क्या!
कुछ तमन्नाएं हैं मेरी.......🌹

श्रृंगार करके जब आओगे,
सबके दिल में उतर जाओगे!
देखेंगी तुमको हजारों नजरें,
कि देखेंगी तुमको हजारों नजरें!
उन हजारों नज़रो में,
मेरी नज़र को ढूंढ पाओगे क्या!
कुछ तमन्नाएं हैं मेरी...🌹

याद है तुम्हें वो बीते पल!
बिताये थे जो मेरे संग कल!
आख़री मुलाक़ात थी वो हमारी,
कि आख़री मुलाक़ात थी वो हमारी!
उस आख़री मुलाक़ात को, तेरे संग गुजारी उस रात को,
मुक़्क़मल कर पाओगी क्या!
कुछ तमन्नाएं हैं मेरी.....🌹

नहीं करता मैं कुछ ज्यादा ख़्वाइश,
न ही मिलने की आजमाइश!
बस मुझको इतना बता दो!
कभी मुझे भूल पाओगे क्या!
कुछ तमन्नाएं हैं मेरी.........🌹


...................*हरी शंकर(नयन)*